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Jharkhand Student Protest Today: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन पिछले कई दिनों से राज्य की राजनीति और भर्ती व्यवस्था का बड़ा मुद्दा बना हुआ था। रांची में छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की जांच और भर्ती परीक्षाओं को लेकर कई मांगें उठाईं। इस दौरान विधानसभा मार्च, पुलिस कार्रवाई और ABVP कार्यकर्ताओं की हिरासत का मामला भी सामने आया।
अब 17 और 18 अगस्त को इस पूरे विवाद में बड़ा बदलाव आया है। झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के साथ-साथ TDPL से जुड़ी कई भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया है। इसके बाद कुछ छात्र नेताओं ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि CBI जांच की मांग को लेकर छात्रों के रुख और आंदोलन की आगे की स्थिति को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए हैं।
Jharkhand Government News: छात्रों का गुस्सा क्यों बढ़ा?

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। छात्र JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में युवा कई वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं या पेपर लीक जैसी शिकायतें सामने आती हैं, तो उम्मीदवारों का भरोसा प्रभावित होता है।इसी वजह से 25 जुलाई से शुरू हुआ यह आंदोलन लगातार आगे बढ़ता गया और बड़ा रूप ले लिया।
JPSC-JSSC विवाद में छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
JPSC-JSSC Reforms Manch से जुड़े प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में ज्यादा पारदर्शिता और व्यवस्था में सुधार चाहते हैं। छात्रों की मांगों में कुछ परीक्षाओं को रद्द करना और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराना भी शामिल है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में CBI जांच या झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की समिति से जांच कराने की मांग शामिल है। छात्रों का कहना है कि जांच ऐसी एजेंसी या समिति से होनी चाहिए जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो।
वहीं सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और कथित अनियमितताओं की जांच CID के स्तर पर चल रही है।
सरकार ने छात्रों की कौन-कौन सी मांगें मानी हैं?
सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। सरकार का दावा है कि उसने छात्रों की बड़ी संख्या में मांगों को स्वीकार किया है और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठाने की बात कही है।
17 अगस्त को झारखंड सरकार ने इस विवाद में बड़ा फैसला लिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। इसके अलावा TSR Data Processing Private Limited यानी TDPL द्वारा 2014 से कराई गई भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने और उनसे जुड़े परिणामों एवं नियुक्तियों पर कार्रवाई की बात सामने आई।सरकार की ओर से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच की बात भी कही गई है। इस फैसले को आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक पर बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा गया।
10 अगस्त के विधानसभा मार्च में क्या हुआ?
10 अगस्त को बड़ी संख्या में JPSC-JSSC अभ्यर्थी रांची में झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव की कोशिश की।
इस दौरान कई बैरिकेड पार करने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। लाठीचार्ज की भी रिपोर्ट सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने कई लोगों के घायल होने का दावा किया, जबकि रांची पुलिस के अनुसार उसके 14 जवान भी घायल हुए।
इस घटना के बाद मामला और राजनीतिक हो गया और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा।
11 अगस्त को 110 ABVP कार्यकर्ताओं को हिरासत में क्यों लिया गया?
10 अगस्त की पुलिस कार्रवाई के विरोध में 11 अगस्त को ABVP ने विधानसभा की ओर मार्च करने का कार्यक्रम रखा। संगठन के कार्यकर्ता पुराने विधानसभा परिसर से नए विधानसभा परिसर की ओर बढ़ रहे थे।
पुलिस ने मार्च के दौरान करीब 110 ABVP कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को बस में ले जाने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच फिर से टकराव की स्थिति बनी। कुछ महिला प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई।
ABVP ने सरकार से छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा और कथित परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच की मांग दोहराई।
हेमंत सोरेन सरकार का क्या कहना है?

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत और भरोसे के साथ आगे बढ़ने की बात कही है। सरकार का कहना है कि भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार किया जा रहा है और कथित अनियमितताओं की जांच भी चल रही है।
वहीं मुख्यमंत्री ने BJP पर छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ BJP ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग की। इस तरह छात्र आंदोलन अब परीक्षा सुधार के मुद्दे के साथ-साथ राजनीतिक विवाद का भी हिस्सा बन गया है।
विधानसभा एक दिन पहले क्यों स्थगित हुई?
छात्र आंदोलन का असर झारखंड विधानसभा की कार्यवाही पर भी देखने को मिला। 11 अगस्त को BJP विधायकों ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच काफी हंगामा हुआ।
लगातार विरोध और नारेबाजी के बीच विधानसभा को निर्धारित समय से एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने सदन में सरकार का पक्ष रखा और जांच तथा परीक्षा सुधार की बात दोहराई।
झारखंड बंद और आंदोलन का क्या असर पड़ा?
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में BJP ने 11 अगस्त को झारखंड बंद का आह्वान किया था। रिपोर्टों के अनुसार, कई जगह सड़कें बाधित रहीं और कुछ क्षेत्रों में बाजार, स्कूल तथा दूसरी गतिविधियां प्रभावित हुईं।
इससे यह साफ हो गया कि JPSC-JSSC का मुद्दा अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा है। यह मामला झारखंड की राजनीति में भी प्रमुख मुद्दा बन गया है।
17-18 अगस्त को झारखंड सरकार ने क्या बड़ा फैसला लिया?
17 अगस्त को सरकार के फैसले के बाद पूरे विवाद में सबसे बड़ा बदलाव आया। JSSC-CGL परीक्षा को रद्द कर दिया गया और TDPL द्वारा कराई गई भर्ती परीक्षाओं पर भी कार्रवाई की गई।
18 अगस्त को छात्र नेताओं में से कुछ ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। रिपोर्टों के अनुसार देवेंद्र नाथ महतो समेत कुछ छात्र नेताओं ने सरकार के फैसले के बाद अपना अनशन खत्म किया।
सरकार के फैसले को आंदोलन की एक बड़ी मांग पूरी होने के रूप में देखा गया। हालांकि लगभग 2,000 ऐसे अभ्यर्थियों की चिंता भी सामने आई जिन्होंने JSSC-CGL परीक्षा पास की थी और अब परीक्षा रद्द होने के बाद अपने भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
18 अगस्त के बाद छात्रों का आंदोलन और आगे की मांगें क्या हैं?

18 अगस्त तक आंदोलन की स्थिति को लेकर पूरी तरह एक जैसी जानकारी सामने नहीं आई है। कुछ छात्र नेताओं ने सरकार के फैसले के बाद शांतिपूर्ण आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की है, जबकि अन्य रिपोर्टों में CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।
यानी JSSC-CGL रद्द होने से विवाद का एक बड़ा हिस्सा जरूर सुलझा है, लेकिन छात्रों की CBI जांच की मांग अभी भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार को किस तरह लागू करती है और छात्र संगठन सरकार के फैसले को किस रूप में स्वीकार करते हैं।
निष्कर्ष
झारखंड का JPSC-JSSC छात्र आंदोलन अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। कई दिनों के प्रदर्शन के बाद सरकार ने JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। इसके बाद कुछ छात्र नेताओं ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी है।
हालांकि CBI जांच की मांग और परीक्षा रद्द होने से प्रभावित सफल अभ्यर्थियों का भविष्य अभी महत्वपूर्ण सवाल बने हुए हैं। इसलिए 18 अगस्त 2026 के बाद इस पूरे मामले में सरकार और छात्र संगठनों के अगले कदम पर नजर रहेगी।
नोट: इस खबर में छात्रों, सरकार, पुलिस और राजनीतिक दलों से जुड़े दावों को संबंधित मीडिया रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। जांच से जुड़े आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।